Belagam
एलिस मनरो को कहानी के पारम्परिक शिल्प में निर्णायक दख़ल देने वाली रचनाकार माना जाता है। अपने सरल दिखने वाले कथानकों में उन्होंने जीवन के जटिलतम प्रश्नों को पकड़ा है और उन्हें अपने ऐसे पात्रों के माध्यम से रेखांकित किया है जिन्हें अखिल मानवता के प्रतिनिधि पात्र कहा जा सकता है। उनकी ज़्यादातर कहानियों का परिवेश उनका अपना क़स्बा रहा है जहाँ वे रहती हैं और इसे उनकी रचनात्मकता का एक विशेष पहलू माना जाता है। यही अहमियत उनकी कहानियों में निहित औपन्यासिक तत्त्वों की भी है जिसके लिए अनेक आलोचकों ने गम्भीरतापूर्वक उनका उल्लेख किया है।
उनकी कहानियों में विडम्बनामूलक व्यंग्य और गम्भीर अवलोकन साथ-साथ चलते हैं। यथार्थ के टटके बिम्ब, स्पष्ट विवरण और इन सबके बीच अपने अस्तित्व का अर्थ खोजते उनके पात्र एक गहरा प्रभाव पाठक के मन पर छोड़ते हैं। कहा जाता है कि एलिस मनरो एक ऐसी कथाकार हैं जिन्होंने जीवन की ऊब का अंकन इतने दिलचस्प ढंग से किया है कि उसे पढ़ते हुए किसी को ऊब नहीं होती।
‘बेलगाम’ में उनके मूल कहानी-संग्रह ‘रनअवे’ की कुछ कहानियों का अनुवाद प्रस्तुत किया जा रहा है। 24 में प्रकाशित इस पुस्तक को कनाडा के शीर्षस्थ साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
160 pages
English edition · First published 2024 by Rajkamal Prakashan · ISBN 9789390971770
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